फिर भी जब सरकार पर सवार खून नहीं उतरा तो उसका हृदय टूट गया। 24 मई को सिपाहियों के नेताओं ने कर्नल के पास आकर पूछा, ‘‘अंगे्रजी सेना पेशावर से हमपर हमला करने आ रही है, क्या यह समाचार सच है?’’ इस प्रश्न का कर्नल ने गोलमोल उŸार दिया। सिपाहियों को उससे संतोष न होते हुए भी वे लौट गए। उस 55वीं नेटिव रेजिमेंट का पेशावर की सेना की तरह खात्मा करने के लिए अंगे्रजों सेना वास्तव में चढ़ी चली आ रही थी। वह दुष्टतापूर्ण
फिर भी जब सरकार पर सवार खून नहीं उतरा तो उसका हृदय टूट गया। 24 मई को सिपाहियों के नेताओं ने कर्नल के पास आकर पूछा, ‘‘अंगे्रजी सेना पेशावर से हमपर हमला करने आ रही है, क्या यह समाचार सच है?’’ इस प्रश्न का कर्नल ने गोलमोल उŸार दिया। सिपाहियों को उससे संतोष न होते हुए भी वे लौट गए। उस 55वीं नेटिव रेजिमेंट का पेशावर की सेना की तरह खात्मा करने के लिए अंगे्रजों सेना वास्तव में चढ़ी चली आ रही थी। वह दुष्टतापूर्ण