1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

दलति वज्रस्व हृदयम!’ उनका पीछा करने के लिए निकल्सन इतना कठोर हो गया था कि वह चैबीस घंटे तक घोड़े से नीचे नहीं उतरा। सैंकड़ों लोग उस लड़ाई में मारे गए और शेष लड़ते-लड़ते सरहद के बाहर निकल गए। परंतु वहां भी उन्हें आश्रय कौन दें? वहां की मुसलमान जमातों ने उनका स्वागत बहुत ही भयंकर तरीके से किया। उनमें से हिंदुओं को अकेले-अकेले पकड़कर बलपूर्वक मुसलमान बनाया जाने लगा। उनमें से हिंदुओं को अकेले-अकेले पकड़कर बलपूर्वक


583 of 2102

दलति वज्रस्व हृदयम!’ उनका पीछा करने के लिए निकल्सन इतना कठोर हो गया था कि वह चैबीस घंटे तक घोड़े से नीचे नहीं उतरा। सैंकड़ों लोग उस लड़ाई में मारे गए और शेष लड़ते-लड़ते सरहद के बाहर निकल गए। परंतु वहां भी उन्हें आश्रय कौन दें? वहां की मुसलमान जमातों ने उनका स्वागत बहुत ही भयंकर तरीके से किया। उनमें से हिंदुओं को अकेले-अकेले पकड़कर बलपूर्वक मुसलमान बनाया जाने लगा। उनमें से हिंदुओं को अकेले-अकेले पकड़कर बलपूर्वक


583 of 2102