तब उन्हें चींटियों, कीड़ों की तरह मसल डालने को अंगे्रजों ने हर कदम
1857 का स्वातंत्र्य समर -131
पर तलवार चलाई। परंतु फिर भी अपने धर्म का त्राता कश्मीर में है, ऐसी उत्कट भावना से वे हजारों सिपाही कश्मीर की ओर बढ़ ही रहे थे। धर्म का त्राता! हाय!! यह ज्ञात होते ही िकवे कश्मीर की ओर आ रहे हैं, वहां के राजा राजपूत कुलोत्पन्न गुलाग सिंह ने उन अनाथ हुए और धर्मरक्षा के लिए मृत्यु से भी बच निकलनेवाले हिंदू
तब उन्हें चींटियों, कीड़ों की तरह मसल डालने को अंगे्रजों ने हर कदम
1857 का स्वातंत्र्य समर -131
पर तलवार चलाई। परंतु फिर भी अपने धर्म का त्राता कश्मीर में है, ऐसी उत्कट भावना से वे हजारों सिपाही कश्मीर की ओर बढ़ ही रहे थे। धर्म का त्राता! हाय!! यह ज्ञात होते ही िकवे कश्मीर की ओर आ रहे हैं, वहां के राजा राजपूत कुलोत्पन्न गुलाग सिंह ने उन अनाथ हुए और धर्मरक्षा के लिए मृत्यु से भी बच निकलनेवाले हिंदू