1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

लोगों को अपने राज्य में प्रवेश करने से मना किया। इतना ही नहीं अपितू इन हिंदुओं में से जो कोई जहां कहीं भी मिल जाए उसे वहीं काट डालने का कड़ा आदेश अपने लश्कर को देकर उसने अपना यह ‘सुकृत्य’ अंगे्रजों के दरबार में बड़े गर्व से सूचित किया। अब या तो धर्मांतरण करना या फिर गुलामी स्वीकार करना या मृत्यु का आंलिगन करना, यही कुछ करना था उन्हें। इन तीनों में से उन हिंदू शूरों ने तीसरा रास्ता अपनाया। अंगे्रजों ने


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लोगों को अपने राज्य में प्रवेश करने से मना किया। इतना ही नहीं अपितू इन हिंदुओं में से जो कोई जहां कहीं भी मिल जाए उसे वहीं काट डालने का कड़ा आदेश अपने लश्कर को देकर उसने अपना यह ‘सुकृत्य’ अंगे्रजों के दरबार में बड़े गर्व से सूचित किया। अब या तो धर्मांतरण करना या फिर गुलामी स्वीकार करना या मृत्यु का आंलिगन करना, यही कुछ करना था उन्हें। इन तीनों में से उन हिंदू शूरों ने तीसरा रास्ता अपनाया। अंगे्रजों ने


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