कदम-कदम पर निष्ठुरता से इतने कत्ल किए कि मैदानों में स्थित वध-स्तंभ निरपराध हिंदू रक्त से भीगकर सड़ने लगे। फिर भी अंगे्रजों को उस रक्तपात से घृणा नहीं हुई। वध-स्तंभ-स्थायी वध-स्तंभ-जब रात-दिन काम करते वधिक थक गए तब तोपों के मुंह खोले गए। और जिस 55वीं रेजिमेंट ने अंगे्रजों के रक्त की एक बंूद भी नहीं बहाई थी उसका हर सिपाही तोप से उड़ा दिया गया। एक हजार हिंदू चुटकी बजाते गारद कर दिए गए। परंतु उस अंतिम समय
कदम-कदम पर निष्ठुरता से इतने कत्ल किए कि मैदानों में स्थित वध-स्तंभ निरपराध हिंदू रक्त से भीगकर सड़ने लगे। फिर भी अंगे्रजों को उस रक्तपात से घृणा नहीं हुई। वध-स्तंभ-स्थायी वध-स्तंभ-जब रात-दिन काम करते वधिक थक गए तब तोपों के मुंह खोले गए। और जिस 55वीं रेजिमेंट ने अंगे्रजों के रक्त की एक बंूद भी नहीं बहाई थी उसका हर सिपाही तोप से उड़ा दिया गया। एक हजार हिंदू चुटकी बजाते गारद कर दिए गए। परंतु उस अंतिम समय