विद्वेष ने उन्हें कैसी-कैसी यंत्रणाएं दी होंगी, वह केवल ईश्वर को ही ज्ञात होगा। क्योंकि उन भयानक कहानियों को इतिहास से पोंछ डालने के लिए अंगे्रजी इतिहासकारों ने उसका कोई संकेत भी अब रहने नहीं दिया है। स्वयं ‘के’, जो प्रमुख अंगे्रज लेखक है, कहता है-‘‘यद्यपि मेरे सामने अंगे्रजों द्वारा की गई भयंकर क्रूरतापूर्ण यंत्रणाओं के वर्णन के ढेर सारे पत्र पड़े हैं, फिर भी यह विषय फिर से विश्व के सामने न आ पाए,
विद्वेष ने उन्हें कैसी-कैसी यंत्रणाएं दी होंगी, वह केवल ईश्वर को ही ज्ञात होगा। क्योंकि उन भयानक कहानियों को इतिहास से पोंछ डालने के लिए अंगे्रजी इतिहासकारों ने उसका कोई संकेत भी अब रहने नहीं दिया है। स्वयं ‘के’, जो प्रमुख अंगे्रज लेखक है, कहता है-‘‘यद्यपि मेरे सामने अंगे्रजों द्वारा की गई भयंकर क्रूरतापूर्ण यंत्रणाओं के वर्णन के ढेर सारे पत्र पड़े हैं, फिर भी यह विषय फिर से विश्व के सामने न आ पाए,