इसलिए मैं उस हेतु एक अक्षर भी नहीं लिखता।’’ ये हैं इतिहासकार! जिन लोगों ने दिल्ली के रास्ते पर गरीब और निरपराध ग्रामीणों के मुंह में मरने के पहले गाय का मांस ठूंसा, उन लोगों ने 55वीं रेजिमेंट के धर्मनिष्ठ सिपाहियों के मंुह में मरने के पहले गाय का मांस ठूसा, उन लोगों ने 55वीं रेजिमेंट के धर्मनिष्ठ सिपाहियों के मंुह में गाय का मांस ठूसकर ही उन्हें तोप से उड़ाया होगा, इसमें शंका की गुंजाइश कहां।
पेशावर
इसलिए मैं उस हेतु एक अक्षर भी नहीं लिखता।’’ ये हैं इतिहासकार! जिन लोगों ने दिल्ली के रास्ते पर गरीब और निरपराध ग्रामीणों के मुंह में मरने के पहले गाय का मांस ठूंसा, उन लोगों ने 55वीं रेजिमेंट के धर्मनिष्ठ सिपाहियों के मंुह में मरने के पहले गाय का मांस ठूसा, उन लोगों ने 55वीं रेजिमेंट के धर्मनिष्ठ सिपाहियों के मंुह में गाय का मांस ठूसकर ही उन्हें तोप से उड़ाया होगा, इसमें शंका की गुंजाइश कहां।
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