1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

बच्चे, पुरूष अपनी-अपनी जान बचाने के लिए तेजी से भागने लगे। परंतु जालंधर के


1857 का स्वातंत्र्य समर - 133

सिपाहियों को अभी फिरंगियों को काटने के लिए समय ही नहीं था। उधर दिल्ली में स्वतंत्रता के निशान पर अंगे्रजी तोपें निशाना साधे हुए थीं, इसलिए हर एक का मन उधर दौड़ रहा था। अॅडर्जटेंट बागशा व्यर्थ में बीच में आ रहा था, इसलिए एक घुड़सवार ने दौड़कर उसे गोली मारकर समाप्त किया। परंतु जालंधर के सिपाही हमारे पूर्ण विश्वास के हैं,


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बच्चे, पुरूष अपनी-अपनी जान बचाने के लिए तेजी से भागने लगे। परंतु जालंधर के


1857 का स्वातंत्र्य समर - 133

सिपाहियों को अभी फिरंगियों को काटने के लिए समय ही नहीं था। उधर दिल्ली में स्वतंत्रता के निशान पर अंगे्रजी तोपें निशाना साधे हुए थीं, इसलिए हर एक का मन उधर दौड़ रहा था। अॅडर्जटेंट बागशा व्यर्थ में बीच में आ रहा था, इसलिए एक घुड़सवार ने दौड़कर उसे गोली मारकर समाप्त किया। परंतु जालंधर के सिपाही हमारे पूर्ण विश्वास के हैं,


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