1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

जैसे अनिश्चित विचार के लोग भी उसमें बह सकते थे और प्रारंभ में ही विजय प्राप्त हो जाने पर जिनके मन क्रांति की ओर झुके हुए थे, पर क्रांति में सम्मिलित होने से डरते थे, उन्हें भी जोश आ जाता।

सारांश यह है कि सिख लोगों के देशद्रोह के कारण् और अधपकी स्थिति में अंगे्रजों ने इन तीन सप्ताहों में चारों ओर यथासंभव बंदोबस्त करके कलकŸाा से इलाहाबाद तक यूरोपियन सेनाओं का निरंतर प्रवाह चालू रखा था। बंबइ, मद्रास,


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जैसे अनिश्चित विचार के लोग भी उसमें बह सकते थे और प्रारंभ में ही विजय प्राप्त हो जाने पर जिनके मन क्रांति की ओर झुके हुए थे, पर क्रांति में सम्मिलित होने से डरते थे, उन्हें भी जोश आ जाता।

सारांश यह है कि सिख लोगों के देशद्रोह के कारण् और अधपकी स्थिति में अंगे्रजों ने इन तीन सप्ताहों में चारों ओर यथासंभव बंदोबस्त करके कलकŸाा से इलाहाबाद तक यूरोपियन सेनाओं का निरंतर प्रवाह चालू रखा था। बंबइ, मद्रास,


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