जैसे अनिश्चित विचार के लोग भी उसमें बह सकते थे और प्रारंभ में ही विजय प्राप्त हो जाने पर जिनके मन क्रांति की ओर झुके हुए थे, पर क्रांति में सम्मिलित होने से डरते थे, उन्हें भी जोश आ जाता।
सारांश यह है कि सिख लोगों के देशद्रोह के कारण् और अधपकी स्थिति में अंगे्रजों ने इन तीन सप्ताहों में चारों ओर यथासंभव बंदोबस्त करके कलकŸाा से इलाहाबाद तक यूरोपियन सेनाओं का निरंतर प्रवाह चालू रखा था। बंबइ, मद्रास,
जैसे अनिश्चित विचार के लोग भी उसमें बह सकते थे और प्रारंभ में ही विजय प्राप्त हो जाने पर जिनके मन क्रांति की ओर झुके हुए थे, पर क्रांति में सम्मिलित होने से डरते थे, उन्हें भी जोश आ जाता।
सारांश यह है कि सिख लोगों के देशद्रोह के कारण् और अधपकी स्थिति में अंगे्रजों ने इन तीन सप्ताहों में चारों ओर यथासंभव बंदोबस्त करके कलकŸाा से इलाहाबाद तक यूरोपियन सेनाओं का निरंतर प्रवाह चालू रखा था। बंबइ, मद्रास,