1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar



वातावरण में उड़ान भरने में सक्षम पंख इन सैनिक बंधुओं के पास हैं? मेरे इस भविष्यवाद को धिक्कारकर गुलामी के अंधियारे के गहृर में सोये सुंदर उषःकाल के दर्शन हेतु मैं उनकी उस नींद को भंग कर रहा हूं। इसलिए मेरे सिर पर ये देशबंधु आघात ही करेंगे! मनोविकारों की ऐसी उथल-पुथल हृदय में चलते हुए भी जिसके चेहरे पर मूर्त शांति विराजमान थी, ऐसा वह ब्राह्यण अपना विलक्षण संदेश लिये लश्कर में प्रवेश कर गया। उन सिपाहियों


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वातावरण में उड़ान भरने में सक्षम पंख इन सैनिक बंधुओं के पास हैं? मेरे इस भविष्यवाद को धिक्कारकर गुलामी के अंधियारे के गहृर में सोये सुंदर उषःकाल के दर्शन हेतु मैं उनकी उस नींद को भंग कर रहा हूं। इसलिए मेरे सिर पर ये देशबंधु आघात ही करेंगे! मनोविकारों की ऐसी उथल-पुथल हृदय में चलते हुए भी जिसके चेहरे पर मूर्त शांति विराजमान थी, ऐसा वह ब्राह्यण अपना विलक्षण संदेश लिये लश्कर में प्रवेश कर गया। उन सिपाहियों


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