को दीक्षा देते हुए उसने कहा कि एक बड़ी सी बरात निकालकर उस हल्ले-गुल्ले में आप सब विद्रोह देते हुए उसने कहा कि एक बड़ी सी बरात निकालकर उस हल्ले-गुल्ले में आप सब विद्रोह करें और सारे अंगे्रजों को मौत के घाट उतारकर दिल्ली की ओर चलें। अंगे्रजों का राज्य उलटने के सिद्धांत का विरोधी कोई था ही नहीं; पर उसमें भी उस सिद्धांत को यथार्थ में कैसे बदला जाए, इस प्रश्न का हल भी सुनकर उसकी ग्राह्यता-अग्राह्यता पर विचार
को दीक्षा देते हुए उसने कहा कि एक बड़ी सी बरात निकालकर उस हल्ले-गुल्ले में आप सब विद्रोह देते हुए उसने कहा कि एक बड़ी सी बरात निकालकर उस हल्ले-गुल्ले में आप सब विद्रोह करें और सारे अंगे्रजों को मौत के घाट उतारकर दिल्ली की ओर चलें। अंगे्रजों का राज्य उलटने के सिद्धांत का विरोधी कोई था ही नहीं; पर उसमें भी उस सिद्धांत को यथार्थ में कैसे बदला जाए, इस प्रश्न का हल भी सुनकर उसकी ग्राह्यता-अग्राह्यता पर विचार