1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

स्वदेशी वीर इधर आ रहे हैं। ऐसे समय आप वहां भोजन कर रहे हों तो हाथ धोने यहां आना। शाहों का बादशाह और वैभव का आगर जो अपना दिल्ली का बादशाह है, वह आपका बढ़िया मान-सम्मान करेगा और आपकी सेवा का उŸाम पुरस्कार भी देगा। आपकी तोपों की गड़गड़ाहट के लिए हमारा कार्य और आपके दर्शनों के लिए हमारे नेत्र चातक की तरह बाट जोह रहे हैं। आइए, जल्दी आइए! क्योंकि बंधु! भवदागमन के वसंत के बिना यहां गुलाब कैसे खिलेगा? दूध के सिवाए बच्चा कैसे जिएगा?


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स्वदेशी वीर इधर आ रहे हैं। ऐसे समय आप वहां भोजन कर रहे हों तो हाथ धोने यहां आना। शाहों का बादशाह और वैभव का आगर जो अपना दिल्ली का बादशाह है, वह आपका बढ़िया मान-सम्मान करेगा और आपकी सेवा का उŸाम पुरस्कार भी देगा। आपकी तोपों की गड़गड़ाहट के लिए हमारा कार्य और आपके दर्शनों के लिए हमारे नेत्र चातक की तरह बाट जोह रहे हैं। आइए, जल्दी आइए! क्योंकि बंधु! भवदागमन के वसंत के बिना यहां गुलाब कैसे खिलेगा? दूध के सिवाए बच्चा कैसे जिएगा?


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