सैनिक अधिकारी अपने क्लब में इकट्ठा होकर खाना खा रहे थे और उनके बाल-बच्चें वहीं हंस-खेल रहे थे। इतने में धूम-धड़ाके का क्या अर्थ होता है, यह जून के पहले हफ्ते में अंगे्रजों को जुबानी याद था। उनकी भयभीत शांति ‘विद्रोह हुआ’, ऐसा एक-दूसरे को कहने लगी। तभी नगाड़ों और दुंदुभि की ध्वनि शुरू हो गई। एक क्षण भी नहीं गया और जिनके हृदय में मेरठ की स्मृतियां ताजा थीं वे गोरे लोग सिर पर पैर रखकर भागने लगे। औरतें-बच्चे,
सैनिक अधिकारी अपने क्लब में इकट्ठा होकर खाना खा रहे थे और उनके बाल-बच्चें वहीं हंस-खेल रहे थे। इतने में धूम-धड़ाके का क्या अर्थ होता है, यह जून के पहले हफ्ते में अंगे्रजों को जुबानी याद था। उनकी भयभीत शांति ‘विद्रोह हुआ’, ऐसा एक-दूसरे को कहने लगी। तभी नगाड़ों और दुंदुभि की ध्वनि शुरू हो गई। एक क्षण भी नहीं गया और जिनके हृदय में मेरठ की स्मृतियां ताजा थीं वे गोरे लोग सिर पर पैर रखकर भागने लगे। औरतें-बच्चे,