अधिकारी-सबने प्राणों की आशा छोड़ दी। पर आजमगढ़ के सैनिकों ने इस तरह मरे हुए-से लोगों को देखकर अधिक प्रतिशोध लेने का विचार छोड़ दिया था। उन्होंने उन गोरे लोगों को जीवित रखने के लिए अपने कब्जे में ले लिया और आजमगढ़ छोड़कर तुरंत चले जाने को कहा। परंतु कुछ भीमकाय सैनिकों ने अंगे्रजी रक्त चखने की भीषण प्रतीज्ञा की हुई थी, उनकी उस भीष्म प्रतीज्ञा का क्या हो? तो लेफ्टिनेंट ने हचिंसन साहब और क्वार्टर सार्जेंट लुई साहब,
अधिकारी-सबने प्राणों की आशा छोड़ दी। पर आजमगढ़ के सैनिकों ने इस तरह मरे हुए-से लोगों को देखकर अधिक प्रतिशोध लेने का विचार छोड़ दिया था। उन्होंने उन गोरे लोगों को जीवित रखने के लिए अपने कब्जे में ले लिया और आजमगढ़ छोड़कर तुरंत चले जाने को कहा। परंतु कुछ भीमकाय सैनिकों ने अंगे्रजी रक्त चखने की भीषण प्रतीज्ञा की हुई थी, उनकी उस भीष्म प्रतीज्ञा का क्या हो? तो लेफ्टिनेंट ने हचिंसन साहब और क्वार्टर सार्जेंट लुई साहब,