कम-से-कम तुम्हारे शरीर में तो ये हमारी गोलियां घुसनी ही चाहिए। बस, अब शेष चाहें तो भाग जाएं। वे दौड़कर नहीं जा सकते हों तो गाड़ियों में बैठकर आजमगढ़ छोड़ दें। फिर भी, हमें कुछ कहना नहीं है। पर यूरोपियन अधिकारी और उनकी पत्नियां कहने लगीं-‘‘पर हमें अब गाड़ियां भी कौन देगा?’’ सैनिकों ने कहा, ‘‘उसकी चिंता न करें। हम देते हैं गाड़ियां।’’ ऐसी विलक्षण उदारता देख कर्ण भी सिर नवाए, इसमें कोई शंका नहीं। सैनिकों ने
कम-से-कम तुम्हारे शरीर में तो ये हमारी गोलियां घुसनी ही चाहिए। बस, अब शेष चाहें तो भाग जाएं। वे दौड़कर नहीं जा सकते हों तो गाड़ियों में बैठकर आजमगढ़ छोड़ दें। फिर भी, हमें कुछ कहना नहीं है। पर यूरोपियन अधिकारी और उनकी पत्नियां कहने लगीं-‘‘पर हमें अब गाड़ियां भी कौन देगा?’’ सैनिकों ने कहा, ‘‘उसकी चिंता न करें। हम देते हैं गाड़ियां।’’ ऐसी विलक्षण उदारता देख कर्ण भी सिर नवाए, इसमें कोई शंका नहीं। सैनिकों ने