1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

इस संकलन के लिए उन्होंने ‘प्रथम भारतीय स्वातंत्र्य समर 1857-59’ जैसा शीर्षक ही अपनाया। इधर सन् 1857 की घटना के स्वरूप को लेकर आर.सी. मजूमदार और उनके शिष्य एस.बी.चैधरी में जबरदस्त बौ˜िक बहस छिड़ गई, जिसका समापन करने के लिए एस.बी.चैधरी ने सन् 1965 में ‘थ्योरीज आॅन इंडियन म्युटिनी’ नामक पुस्तक प्रकाशित की। इस पुस्तक में उन्होंने सन् 1857 से अब तक इस घटना के स्वरूप के बारे में जितने मत प्रतिपादित हुए थे और नामकरण किए गए थे,


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इस संकलन के लिए उन्होंने ‘प्रथम भारतीय स्वातंत्र्य समर 1857-59’ जैसा शीर्षक ही अपनाया। इधर सन् 1857 की घटना के स्वरूप को लेकर आर.सी. मजूमदार और उनके शिष्य एस.बी.चैधरी में जबरदस्त बौ˜िक बहस छिड़ गई, जिसका समापन करने के लिए एस.बी.चैधरी ने सन् 1965 में ‘थ्योरीज आॅन इंडियन म्युटिनी’ नामक पुस्तक प्रकाशित की। इस पुस्तक में उन्होंने सन् 1857 से अब तक इस घटना के स्वरूप के बारे में जितने मत प्रतिपादित हुए थे और नामकरण किए गए थे,


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