1857 का स्वातंत्र्य समर - 178
जाते थे और तारयंत्र कान से लगाए अंगे्रज उस संबंध में कैसे अज्ञानी रहते थे, यह अंगे्रज अधिकारियों के लिए बड़ा कूट प्रश्न था। कानपुर के नेटिव सिपाहियों को मेरठ में हुए विद्रोह का समाचार विद्रोह होने के बाद तार से सूचित करने की आवश्यकता नहीं थी। क्योंकि वह विद्रोह से एक दिन पूर्व ही जीवित तारों से ज्ञात हो चुका था। कानपुर के अंगे्रज अधिकारियों को जब यह समाचार विदित हुआ
1857 का स्वातंत्र्य समर - 178
जाते थे और तारयंत्र कान से लगाए अंगे्रज उस संबंध में कैसे अज्ञानी रहते थे, यह अंगे्रज अधिकारियों के लिए बड़ा कूट प्रश्न था। कानपुर के नेटिव सिपाहियों को मेरठ में हुए विद्रोह का समाचार विद्रोह होने के बाद तार से सूचित करने की आवश्यकता नहीं थी। क्योंकि वह विद्रोह से एक दिन पूर्व ही जीवित तारों से ज्ञात हो चुका था। कानपुर के अंगे्रज अधिकारियों को जब यह समाचार विदित हुआ