1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

दिन शाम को जब सारे मुसलमानों ने परंपरा के अनुसार साहब लोगों से ईद मिलन किया तब सर व्हीलर को फिर से एक बार बहुत संतोष हुआ। परंपरा के अनुसार रानी के जन्मदिन पर उसे तोपों की सलामी दी जाती थी, परंतु कदाचित् उस आवाज से सिपाहियों में बेकार ही गड़बड़ी होगी, इसलिए वह सलामी नहीं दी गई। अंगे्रजों की महारानी में बेकार ही गड़बड़ी होगी, इसलिए वह सलामी नहीं दी गई। अंगे्रजों की महारानी को उसके जन्ददिन पर स्वयं उसकी सेना में ही सलामी देने की शक्ति न हो,


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दिन शाम को जब सारे मुसलमानों ने परंपरा के अनुसार साहब लोगों से ईद मिलन किया तब सर व्हीलर को फिर से एक बार बहुत संतोष हुआ। परंपरा के अनुसार रानी के जन्मदिन पर उसे तोपों की सलामी दी जाती थी, परंतु कदाचित् उस आवाज से सिपाहियों में बेकार ही गड़बड़ी होगी, इसलिए वह सलामी नहीं दी गई। अंगे्रजों की महारानी में बेकार ही गड़बड़ी होगी, इसलिए वह सलामी नहीं दी गई। अंगे्रजों की महारानी को उसके जन्ददिन पर स्वयं उसकी सेना में ही सलामी देने की शक्ति न हो,


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