गाड़ियों, डोलियों आदि सवारियों की भीड़ सहसा ही लग जाती थी और उनमें लेखकों, व्यापारियों, महिलाओं-जो बालकों को छाती से चिपकाए होती थी-बालकों, धायों और अधिकारियों आदि सभी को पहंुचा दिया जाता था। सार रूप में कहा जाए तो यह कहना उपयुक्त होगा कि ज्यों कि किसी प्रकार के उपद्रव की आशंका होती अथवा समाचार प्राप्त होता तो वहां हमारा अभिनंदन करनेवाला भी कोई न होता; क्योंकि उपर्युक्त दृश्यों से हम भारतीयों को यह स्पष्टत;
गाड़ियों, डोलियों आदि सवारियों की भीड़ सहसा ही लग जाती थी और उनमें लेखकों, व्यापारियों, महिलाओं-जो बालकों को छाती से चिपकाए होती थी-बालकों, धायों और अधिकारियों आदि सभी को पहंुचा दिया जाता था। सार रूप में कहा जाए तो यह कहना उपयुक्त होगा कि ज्यों कि किसी प्रकार के उपद्रव की आशंका होती अथवा समाचार प्राप्त होता तो वहां हमारा अभिनंदन करनेवाला भी कोई न होता; क्योंकि उपर्युक्त दृश्यों से हम भारतीयों को यह स्पष्टत;