1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

‘‘अपने मन मंे बसी हुई प्रीत के कारण मृत्यु के भय की भी परवाह न करते हुए एक खुशी का समाचार देने आया हूं, गंगा पार साहब लोगों की एक सेना तोपों के साथ आई हुई है और वह कल तुम्हारी मुक्ति के लिए आनेवाली है। इस कारण इन हरामखोर विद्रोहियों के शिविर में बड़ी घबराहट और आपाधापी मची हुई है और हम जैसे सारे राजनिष्ठ लोग अंगे्रजों से मिलने को तैयार हैं।’’ यह सुनकर अंगे्रजों को लगा कि उनके द्वारा भेजे गए दूत की विजय


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‘‘अपने मन मंे बसी हुई प्रीत के कारण मृत्यु के भय की भी परवाह न करते हुए एक खुशी का समाचार देने आया हूं, गंगा पार साहब लोगों की एक सेना तोपों के साथ आई हुई है और वह कल तुम्हारी मुक्ति के लिए आनेवाली है। इस कारण इन हरामखोर विद्रोहियों के शिविर में बड़ी घबराहट और आपाधापी मची हुई है और हम जैसे सारे राजनिष्ठ लोग अंगे्रजों से मिलने को तैयार हैं।’’ यह सुनकर अंगे्रजों को लगा कि उनके द्वारा भेजे गए दूत की विजय


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