के कारण विद्रोहियों में फूट पड़ गई होगी और इसी समय लखनऊ से यूरोपियन भी आ गए होंगे। दूसरे दिन वही भिश्ती
1857 का स्वातंत्र्य समर - 189
ऊपर आया और चिल्लाया, ‘‘साहब लोगों की जय! गंगा में आई बाढ़ के कारण येूरोपियन सेना को आने में देर हो गई थी, परंतु अब सब ठीक-ठाक होकर वे निकल पड़े हैं। इस दिन के अंत तक साहब लोगों की जय-जयकार होगी।’’ वह दिन गया, परंतु अंगे्रजों की दृष्टि में यूरोपियन सेना भी नहीं आई और
के कारण विद्रोहियों में फूट पड़ गई होगी और इसी समय लखनऊ से यूरोपियन भी आ गए होंगे। दूसरे दिन वही भिश्ती
1857 का स्वातंत्र्य समर - 189
ऊपर आया और चिल्लाया, ‘‘साहब लोगों की जय! गंगा में आई बाढ़ के कारण येूरोपियन सेना को आने में देर हो गई थी, परंतु अब सब ठीक-ठाक होकर वे निकल पड़े हैं। इस दिन के अंत तक साहब लोगों की जय-जयकार होगी।’’ वह दिन गया, परंतु अंगे्रजों की दृष्टि में यूरोपियन सेना भी नहीं आई और