1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

गए तब भी भरा नहीं है। उसे भरने के लिए आवश्यक मलहम अभी मिला नहीं है। शमप्रधान और क्षमाशील हिंद भूमि का यह कैसा द्वेष! यह कैसा वैर! सौ वर्ष बीत गए तब भी प्लासी मिलता रहता है। यह गुरू परंपरा आज सौ वर्ष से चलते हुए आज सन् 1857 के 23 जून का उदय हुआ है। इस दिन तेरा प्रतिशोध पूरा किया जाएगा-ऐसे आश्वासन हिंदभूमि को भविष्यवक्ताओं ने दिया है। नाना साहब, उसकी पूर्ति करना या न करना-यह यद्यपि ईश्वराधीन है फिर भी


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गए तब भी भरा नहीं है। उसे भरने के लिए आवश्यक मलहम अभी मिला नहीं है। शमप्रधान और क्षमाशील हिंद भूमि का यह कैसा द्वेष! यह कैसा वैर! सौ वर्ष बीत गए तब भी प्लासी मिलता रहता है। यह गुरू परंपरा आज सौ वर्ष से चलते हुए आज सन् 1857 के 23 जून का उदय हुआ है। इस दिन तेरा प्रतिशोध पूरा किया जाएगा-ऐसे आश्वासन हिंदभूमि को भविष्यवक्ताओं ने दिया है। नाना साहब, उसकी पूर्ति करना या न करना-यह यद्यपि ईश्वराधीन है फिर भी


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