1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

जो बहुत बहादुर थे उन्होंने एक तरफ जाकर गंगा का पानी हाथ में लेकर या कुरान पर हाथ रखकर प्रतिज्ञा ली कि आज या तो स्वतंत्रता प्राप्त करनी है या मारते-मारते मर जाना है। घुड़सवारों ने ऐसी दौड़ लगाई कि शत्रु की गोलाबारी की परवाह न करते वे चारदीवारी तक जाकर भिड़ गए। पैदल सेना ने कपास के बड़े-बड़े गट्ठों को धकेलते-धकेलते उसके सहारे से चारदीवारी पर गोलियों की बौछार चालू की। विद्रोहियों की सेना से आसपास के गांववाले


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जो बहुत बहादुर थे उन्होंने एक तरफ जाकर गंगा का पानी हाथ में लेकर या कुरान पर हाथ रखकर प्रतिज्ञा ली कि आज या तो स्वतंत्रता प्राप्त करनी है या मारते-मारते मर जाना है। घुड़सवारों ने ऐसी दौड़ लगाई कि शत्रु की गोलाबारी की परवाह न करते वे चारदीवारी तक जाकर भिड़ गए। पैदल सेना ने कपास के बड़े-बड़े गट्ठों को धकेलते-धकेलते उसके सहारे से चारदीवारी पर गोलियों की बौछार चालू की। विद्रोहियों की सेना से आसपास के गांववाले


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