भी आकर मिल गए थे। अंगे्रजों ने भी चारदीवारी से गोलियों और तोप-गोलों की बौछार चालू रखी थी। विद्रोहियों की सेना को रोकना यद्यपि उन्हें असंभव हुआ, फिर भी उन्होंने उन्हें चारदीवारी पर चढ़ने नहीं दिया। लड़ाई का जोश भी जल्दी ही ठंडा पड़ गया और प्लासी के दिन का आधा बदला लेकर विद्रोही स्वयं ही लौट आए।
परंतु कानपुर का यह अंतिम आक्रमण बिलकुल ही व्यर्थ नहीं गया। उस दिन के हमले से अंगे्रजों की सारी आशाएं विनष्ट
भी आकर मिल गए थे। अंगे्रजों ने भी चारदीवारी से गोलियों और तोप-गोलों की बौछार चालू रखी थी। विद्रोहियों की सेना को रोकना यद्यपि उन्हें असंभव हुआ, फिर भी उन्होंने उन्हें चारदीवारी पर चढ़ने नहीं दिया। लड़ाई का जोश भी जल्दी ही ठंडा पड़ गया और प्लासी के दिन का आधा बदला लेकर विद्रोही स्वयं ही लौट आए।
परंतु कानपुर का यह अंतिम आक्रमण बिलकुल ही व्यर्थ नहीं गया। उस दिन के हमले से अंगे्रजों की सारी आशाएं विनष्ट