हो गई। उनका सारा धीरज भी टूट गया और इसके आगे नाना के हाथ से बच पाना असंभव है, ऐसा उनका स्पष्ट दिखाई दिया। 23 जून नहीं, 25 जून को अंगे्रजों ने संधि के लिए झंडा लगा दिया। यह झंडा देखते ही श्रीमंत ने युद्ध रोकने का आदेश दिया और जेलबंद अंगे्रजों में से एक महिला के साथ जनरल व्हीलर को यह चिट्ठी भेजी-‘‘क्वीन विक्टोरिया की प्रजा को-डलहौजी की
1857 का स्वातंत्र्य समर - 193
राजनीति से जिनका किसी भी तरह
हो गई। उनका सारा धीरज भी टूट गया और इसके आगे नाना के हाथ से बच पाना असंभव है, ऐसा उनका स्पष्ट दिखाई दिया। 23 जून नहीं, 25 जून को अंगे्रजों ने संधि के लिए झंडा लगा दिया। यह झंडा देखते ही श्रीमंत ने युद्ध रोकने का आदेश दिया और जेलबंद अंगे्रजों में से एक महिला के साथ जनरल व्हीलर को यह चिट्ठी भेजी-‘‘क्वीन विक्टोरिया की प्रजा को-डलहौजी की
1857 का स्वातंत्र्य समर - 193
राजनीति से जिनका किसी भी तरह