और लोगों के मन में आशा भंग होने से बादल गरजने लगे। नदी पर नौकाओं की तैयारी देखने आए हुए अंग्रेज अधिकारियों को भागीरथी के तीर पर इधर-उधर डेरा लगाए सिपाहियों में-कत्ल-कत्ल की चल रही फुसफुसाहट स्पष्ट सुनाई दे रही थी। ऐसा कहते हैं कि राजमहल के एक पंडित ने राष्ट्र के साथ विश्वासघात करनेवालों और हत्यारों का शिरश्छेद करने में धर्म की कोई रोक नहीं है, यह भी सिपाहियों को समझा दिया था।
इस भयानक वातावरण में
और लोगों के मन में आशा भंग होने से बादल गरजने लगे। नदी पर नौकाओं की तैयारी देखने आए हुए अंग्रेज अधिकारियों को भागीरथी के तीर पर इधर-उधर डेरा लगाए सिपाहियों में-कत्ल-कत्ल की चल रही फुसफुसाहट स्पष्ट सुनाई दे रही थी। ऐसा कहते हैं कि राजमहल के एक पंडित ने राष्ट्र के साथ विश्वासघात करनेवालों और हत्यारों का शिरश्छेद करने में धर्म की कोई रोक नहीं है, यह भी सिपाहियों को समझा दिया था।
इस भयानक वातावरण में