जून की 27 तारीख का उदय हुआ। सŸाीचैरा घाट से अंगे्रजों को संदेश दिया जाना था। उस घाट के इधर-उधर तोपें तनी हुई थीं और घुड़सवार और पैदल सेना भी वहां भीड़ किए थी। कानपुर शहर के हजारों नागरिक गंगा किनारे आज क्या देखने को मिलेगा, इस संबंध में अपने-अपने मन में भिन्न-भिन्न चित्र बनाते हुए सवेरा होते ही उस घाट की ओर चल पड़े थे। अजीमुल्ला खान, श्रीमंत बाबा साहब और सेनापति तात्या टोपे भी उस घाट के पास एक मंदिर के
जून की 27 तारीख का उदय हुआ। सŸाीचैरा घाट से अंगे्रजों को संदेश दिया जाना था। उस घाट के इधर-उधर तोपें तनी हुई थीं और घुड़सवार और पैदल सेना भी वहां भीड़ किए थी। कानपुर शहर के हजारों नागरिक गंगा किनारे आज क्या देखने को मिलेगा, इस संबंध में अपने-अपने मन में भिन्न-भिन्न चित्र बनाते हुए सवेरा होते ही उस घाट की ओर चल पड़े थे। अजीमुल्ला खान, श्रीमंत बाबा साहब और सेनापति तात्या टोपे भी उस घाट के पास एक मंदिर के