चबूतरे पर जाकर खड़े थे। उस मंदिर का नाम भी उस प्रलय काल को शोभा देनेवाला था। मानो सारे प्रदेश का अधिपति पद उस मंदिर को दिया गया है, ऐसा लगता है। क्योंकि उस मंदिर में हरदेव की मूर्ति स्थापित थी।
चारदीवारी का स्थान छोड़कर गंगा किनारे अंगे्रजों को लाने के लिए नाना ने उŸाम वाहन भेज दिए थे। सर हो व्हीलर के लिए तो उŸाम रीति से सजे हाथी लेकर स्वयं नाना साहब के हाथी का महावत चारदीवारी के दरवाजे का आकर खड़ा
चबूतरे पर जाकर खड़े थे। उस मंदिर का नाम भी उस प्रलय काल को शोभा देनेवाला था। मानो सारे प्रदेश का अधिपति पद उस मंदिर को दिया गया है, ऐसा लगता है। क्योंकि उस मंदिर में हरदेव की मूर्ति स्थापित थी।
चारदीवारी का स्थान छोड़कर गंगा किनारे अंगे्रजों को लाने के लिए नाना ने उŸाम वाहन भेज दिए थे। सर हो व्हीलर के लिए तो उŸाम रीति से सजे हाथी लेकर स्वयं नाना साहब के हाथी का महावत चारदीवारी के दरवाजे का आकर खड़ा