हुआ था। उस हाथी पर अपना जुलूस निकलवाना सर व्हीलर के मन को नहीं जंचा,
1857 का स्वातंत्र्य समर - 195
इसलिए उसने बाल-बच्चे हाथी पर चढ़ा दिए और स्वयं पालकी में बैठा। अंगे्रज महिलाओं को भी पालकियां दी गई थीं। ऐसे ठाट से यह जुलूस निकला। कानपुर की चारदीवारी पर लगा अंगे्रजी झंडा नीचे उतारा गया और वहां सद्धर्म का संयुक्त ध्वज और स्वराज्य का झंडा लहराने लगा। अंग्रेजी अभिमान के हुए अपमान से दिल जलते हुए भी
हुआ था। उस हाथी पर अपना जुलूस निकलवाना सर व्हीलर के मन को नहीं जंचा,
1857 का स्वातंत्र्य समर - 195
इसलिए उसने बाल-बच्चे हाथी पर चढ़ा दिए और स्वयं पालकी में बैठा। अंगे्रज महिलाओं को भी पालकियां दी गई थीं। ऐसे ठाट से यह जुलूस निकला। कानपुर की चारदीवारी पर लगा अंगे्रजी झंडा नीचे उतारा गया और वहां सद्धर्म का संयुक्त ध्वज और स्वराज्य का झंडा लहराने लगा। अंग्रेजी अभिमान के हुए अपमान से दिल जलते हुए भी