उपस्थित सारे लश्कर की भी परेड बुलाई गई। पैदल सेना की छह पूरी रेजिमेंट और घुड़सवारों की दो रेजिमेंट उस समारोह में उपस्थित थीं। इसके अतिरिक्त गांव-गांव से इस स्वदेशीय युद्ध के लिए आई हुई स्वयंसेवकों की टोलियां भी अपने-अपने निशान लेकर खड़ी थी। जिसके पराक्रम से कानपुर जीता जा सका था उस मुट्ठी भर परंतु शौर्ययुक्त तोपखाने का मान इस दिन यथार्थ में प्रथम रखा हुआ था। बाला साहब सेना में पहले से ही प्रिय होने से
उपस्थित सारे लश्कर की भी परेड बुलाई गई। पैदल सेना की छह पूरी रेजिमेंट और घुड़सवारों की दो रेजिमेंट उस समारोह में उपस्थित थीं। इसके अतिरिक्त गांव-गांव से इस स्वदेशीय युद्ध के लिए आई हुई स्वयंसेवकों की टोलियां भी अपने-अपने निशान लेकर खड़ी थी। जिसके पराक्रम से कानपुर जीता जा सका था उस मुट्ठी भर परंतु शौर्ययुक्त तोपखाने का मान इस दिन यथार्थ में प्रथम रखा हुआ था। बाला साहब सेना में पहले से ही प्रिय होने से