को सोलह-सत्रह तोपों की सलामी दी गई। ब्रिगेडियर ज्वाला प्रसाद और सेनापति तात्या टोपे को भी ग्यारह-ग्यारह तोपों का सम्मान मिला। इस तरह उस दिन के सूर्यनारायण को स्वातंन्न्य समर में विजयी तोपों के धमाके सुनाकर सारी सेना को अपने शिविर में भेज दिया गया।
लश्कर की यह परेड हो जाने के बाद श्रीमंत नाना साहब श्रीमंत बाला साहब के साथ ब्रह्यवर्त के उस इतिहास-प्रसिद्ध राजभवन की क्या शोभा होगी! पेशवाओं का वह पुरातन
को सोलह-सत्रह तोपों की सलामी दी गई। ब्रिगेडियर ज्वाला प्रसाद और सेनापति तात्या टोपे को भी ग्यारह-ग्यारह तोपों का सम्मान मिला। इस तरह उस दिन के सूर्यनारायण को स्वातंन्न्य समर में विजयी तोपों के धमाके सुनाकर सारी सेना को अपने शिविर में भेज दिया गया।
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