1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

दो बहादूर योद्धाओं ने विद्रोहियों का झंडा किले की दीवार तक जा भिड़ाया और अब विद्रोही सेना किले में पल-दो-पल में घुसेगी, ऐसा रंग दिखने लगा। तब अंगे्रजों ने किले पर संधि का झंडा लगाया और लड़ाई बंद हो गई। दूसरे दिन विजयी विद्रोहियों के प्रतिनिधि झांसी का प्रसिद्ध हकीम सालेह मोहम्मद से अंगे्रजों ने बातचीत शुरू की और जीवनदान मांगा। यह शर्त सालेह मोहम्मद ने कुरान पर हाथ रखकर स्वीकार की और अंगे्रजों ने तुरंत


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दो बहादूर योद्धाओं ने विद्रोहियों का झंडा किले की दीवार तक जा भिड़ाया और अब विद्रोही सेना किले में पल-दो-पल में घुसेगी, ऐसा रंग दिखने लगा। तब अंगे्रजों ने किले पर संधि का झंडा लगाया और लड़ाई बंद हो गई। दूसरे दिन विजयी विद्रोहियों के प्रतिनिधि झांसी का प्रसिद्ध हकीम सालेह मोहम्मद से अंगे्रजों ने बातचीत शुरू की और जीवनदान मांगा। यह शर्त सालेह मोहम्मद ने कुरान पर हाथ रखकर स्वीकार की और अंगे्रजों ने तुरंत


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