जाय।’’ झांसी के कैदखाने के मुसलमान दारोगा ने स्कीन साहब का सिर कलम किया और तत्काल ही पुरूष, महिला, बच्चे मिलाकर साठ गोरे सिर गेंद की तरह उछलकर खड़े थे। वे औरतें, उनकी गोद के छोटे बच्चे और सटकर खड़े बड़े बच्चे भी गोरे रंग अपराध के कारण काले रंग की तलवार से ‘सटाक’ काटे गए। एक क्षण में रक्त की तेज धार बहने लगी। झांसी के घनीभूत अन्याय का ऐसा द्रवीकरण हुआ।
1857 का स्वातंत्र्य समर - 202
झांसी के गुस्सैल जबडे़ में पचहŸार अंगे्रज पुरूषों,
जाय।’’ झांसी के कैदखाने के मुसलमान दारोगा ने स्कीन साहब का सिर कलम किया और तत्काल ही पुरूष, महिला, बच्चे मिलाकर साठ गोरे सिर गेंद की तरह उछलकर खड़े थे। वे औरतें, उनकी गोद के छोटे बच्चे और सटकर खड़े बड़े बच्चे भी गोरे रंग अपराध के कारण काले रंग की तलवार से ‘सटाक’ काटे गए। एक क्षण में रक्त की तेज धार बहने लगी। झांसी के घनीभूत अन्याय का ऐसा द्रवीकरण हुआ।
1857 का स्वातंत्र्य समर - 202
झांसी के गुस्सैल जबडे़ में पचहŸार अंगे्रज पुरूषों,