बारह महिलाओं और तेईस बच्चों की विद्रोहियों ने बलि ली। 4 जून को झांसी ने विद्रोह किया और 8 जून को अंगे्रजी राज्यसŸाा का झांसी से अंत हो गया। और अंगे्रजों की ओर से अपने को वारिस कहनेवाला कोई न बचने से विद्रोही सिपाहियों ने रानी साहब लक्ष्मीबाई को झांसी के स्वातंन्न्य सिंहासन पर प्रतिष्ठित किया और वीर रानी के नाम से नारा लगाया-‘‘खल्क खुदा का, मुल्क बादशाह का और शासन रानी लक्ष्मीबाई का।’’
1857 का स्वातंत्र्य समर - 203
बारह महिलाओं और तेईस बच्चों की विद्रोहियों ने बलि ली। 4 जून को झांसी ने विद्रोह किया और 8 जून को अंगे्रजी राज्यसŸाा का झांसी से अंत हो गया। और अंगे्रजों की ओर से अपने को वारिस कहनेवाला कोई न बचने से विद्रोही सिपाहियों ने रानी साहब लक्ष्मीबाई को झांसी के स्वातंन्न्य सिंहासन पर प्रतिष्ठित किया और वीर रानी के नाम से नारा लगाया-‘‘खल्क खुदा का, मुल्क बादशाह का और शासन रानी लक्ष्मीबाई का।’’
1857 का स्वातंत्र्य समर - 203