1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

की कनिष्ठ सीढ़ी पर पहंुच गए। जिस गुलामी के कारण यह दुर्दशा उत्पन्न हुई थी उससे सबके मन में उसके प्रति भारी द्वेष बढ़ने लगा। राजधनी और राजदरबार में ही केवल दासता के ये पाश कसने लगे थे, ऐसा नहीं था। उस सारे प्रदेश में बड़े-बड़े जमींदारों और राजाओं के पीढ़ी-दर-पीढ़ी जो अधिकार, जागीरें, इनाम आदि चले आ रहे थे वे सब अंगे्रजों ने छीन लिये-इस कारण उन सब बड़े-बड़े राजाओं और जागीरदारों को अत्यंत कनिष्ठ स्वराज्य और अति श्रेष्ठ गुलामी में पहला कितना श्रेयस्कर,


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की कनिष्ठ सीढ़ी पर पहंुच गए। जिस गुलामी के कारण यह दुर्दशा उत्पन्न हुई थी उससे सबके मन में उसके प्रति भारी द्वेष बढ़ने लगा। राजधनी और राजदरबार में ही केवल दासता के ये पाश कसने लगे थे, ऐसा नहीं था। उस सारे प्रदेश में बड़े-बड़े जमींदारों और राजाओं के पीढ़ी-दर-पीढ़ी जो अधिकार, जागीरें, इनाम आदि चले आ रहे थे वे सब अंगे्रजों ने छीन लिये-इस कारण उन सब बड़े-बड़े राजाओं और जागीरदारों को अत्यंत कनिष्ठ स्वराज्य और अति श्रेष्ठ गुलामी में पहला कितना श्रेयस्कर,


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