गया। क्रांति पक्ष के बड़े-बड़े नेताओं से वह स्वयं मिला। अवध के राजपरिवार में उसकी सलाह के बिना पŸाा भी नहीं हिलता था। उसने आगरा में गुप्त मंडली की स्थापना की। उसने लखनऊ में ब्रिटिश सता को उखाड़ फेंकने का खुला उपदेश दिया। अवध प्रदेश के जनपदों की उस पद बड़ी श्रद्धा उत्पन्न हो गयी थी। शरीर, मन, वाणी एवं बुद्धि से स्वदेश की स्वतंत्रता के उपदेश और गुप्त संगठनों के जाल बुनने का अश्रांत श्रम करने के बाद
1857 का स्वातंत्र्य समर - 210
गया। क्रांति पक्ष के बड़े-बड़े नेताओं से वह स्वयं मिला। अवध के राजपरिवार में उसकी सलाह के बिना पŸाा भी नहीं हिलता था। उसने आगरा में गुप्त मंडली की स्थापना की। उसने लखनऊ में ब्रिटिश सता को उखाड़ फेंकने का खुला उपदेश दिया। अवध प्रदेश के जनपदों की उस पद बड़ी श्रद्धा उत्पन्न हो गयी थी। शरीर, मन, वाणी एवं बुद्धि से स्वदेश की स्वतंत्रता के उपदेश और गुप्त संगठनों के जाल बुनने का अश्रांत श्रम करने के बाद
1857 का स्वातंत्र्य समर - 210