राय के सही उत्तराधिकारी थे। उन्होंने राजा राममोहन राय की-वेदान्त, स्वदेश-प्रेम तथा हिन्दू और मुसलमानों से समान प्रीति-तीनों शिक्षिाओं को भली-भांति समझा और उन्नीसवीं शताब्दी के अन्त तक की परिस्थिति में उन्हें आगे बढ़ाया।
इसके अलावा विवेकानन्द की तीक्ष्ण दृष्टि ने पूर्वक्षितिज पर अरूणोदय देखा और नये भारत का श्रीगणेश किया और इस बात की प्रतीक्षा में कि आगे बहुत कुछ घटित होने वाला है वे चल बसे।
इस प्रतीक्षा की बात तथा आगे
राय के सही उत्तराधिकारी थे। उन्होंने राजा राममोहन राय की-वेदान्त, स्वदेश-प्रेम तथा हिन्दू और मुसलमानों से समान प्रीति-तीनों शिक्षिाओं को भली-भांति समझा और उन्नीसवीं शताब्दी के अन्त तक की परिस्थिति में उन्हें आगे बढ़ाया।
इसके अलावा विवेकानन्द की तीक्ष्ण दृष्टि ने पूर्वक्षितिज पर अरूणोदय देखा और नये भारत का श्रीगणेश किया और इस बात की प्रतीक्षा में कि आगे बहुत कुछ घटित होने वाला है वे चल बसे।
इस प्रतीक्षा की बात तथा आगे