जो घृणित रूप धारण कर लिया था उसे उन्हांेने भली-भांति समझ लिया था। इस समय उनके मन में जो उथल-पुथल हो रही थी, उसे 30 अक्टूबर, 1899 को रिजले मर्नर से मेरी हेल के नाम लिखे पत्र में यों व्यक्त किया है:
‘‘तुम्हारी चिट्ठी मिली और इसके लिए अनुग्रहीत हूं कि किसी बात ने आशावादी एकान्तवाद को सक्रिय होने के लिए विवश किया है। यों तो तुम्हारे प्रश्नों ने नैराश्य के श्रोत ही को खोल दिया है। आधुनिक भारत में अंगे्रज़ी शासन का केवल एक
जो घृणित रूप धारण कर लिया था उसे उन्हांेने भली-भांति समझ लिया था। इस समय उनके मन में जो उथल-पुथल हो रही थी, उसे 30 अक्टूबर, 1899 को रिजले मर्नर से मेरी हेल के नाम लिखे पत्र में यों व्यक्त किया है:
‘‘तुम्हारी चिट्ठी मिली और इसके लिए अनुग्रहीत हूं कि किसी बात ने आशावादी एकान्तवाद को सक्रिय होने के लिए विवश किया है। यों तो तुम्हारे प्रश्नों ने नैराश्य के श्रोत ही को खोल दिया है। आधुनिक भारत में अंगे्रज़ी शासन का केवल एक