योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

ही सांत्वनादायक पक्ष है कि एक बार फिर उसने अनजाने ही भारत को विश्व के रंगमंच पर लाकर खड़ा कर दिया है अगर जतना के मंगल के लिए ऐसा किया गया होता तो जैसे परिस्थितियों ने जापान की सहायता की, भारत के लिए इसका परिणाम और भी आश्यर्चजनक होता। जब मुख्य ध्येय खून चूसना हो, कोई कल्याण नहीं हो सकता। मोटे रूप से जनता के लिए पुराना शासन अधिक अच्छा था, क्योंकि जनता से वह सब कुछ नहीं छीनता था और उसमें कुछ न्याय था, कुछ स्वतंत्रता थी।


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ही सांत्वनादायक पक्ष है कि एक बार फिर उसने अनजाने ही भारत को विश्व के रंगमंच पर लाकर खड़ा कर दिया है अगर जतना के मंगल के लिए ऐसा किया गया होता तो जैसे परिस्थितियों ने जापान की सहायता की, भारत के लिए इसका परिणाम और भी आश्यर्चजनक होता। जब मुख्य ध्येय खून चूसना हो, कोई कल्याण नहीं हो सकता। मोटे रूप से जनता के लिए पुराना शासन अधिक अच्छा था, क्योंकि जनता से वह सब कुछ नहीं छीनता था और उसमें कुछ न्याय था, कुछ स्वतंत्रता थी।


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