के विरूद्व लड़ने को तैयार थे। स्वामी विवेकानन्द आने वाली घटनाओं को साफ-साफ देख रहे थे और तूफान की आहट सुन रहे थे। लेकिन उनके गुरू-भाइयों तथा शिष्यों के पास न तो बदले हुए ध्येय को समझने वाली बुद्वि थी, न आने वाली घटनाओं को देखने वाली दृष्टि और न ही तूफान की आहट सुनने वाले कान थे। वे अब भी भक्ति-मुक्ति और शास्त्र-पोथी की बात करते और गौण को प्रधान बनाए हुए थे। विवेकानन्द का बड़ा प्रभाव था, गुरू-भाई और शिष्य उनका आदर करते और जैसा वे कहते थे,
के विरूद्व लड़ने को तैयार थे। स्वामी विवेकानन्द आने वाली घटनाओं को साफ-साफ देख रहे थे और तूफान की आहट सुन रहे थे। लेकिन उनके गुरू-भाइयों तथा शिष्यों के पास न तो बदले हुए ध्येय को समझने वाली बुद्वि थी, न आने वाली घटनाओं को देखने वाली दृष्टि और न ही तूफान की आहट सुनने वाले कान थे। वे अब भी भक्ति-मुक्ति और शास्त्र-पोथी की बात करते और गौण को प्रधान बनाए हुए थे। विवेकानन्द का बड़ा प्रभाव था, गुरू-भाई और शिष्य उनका आदर करते और जैसा वे कहते थे,