होता है। उस समय तो वे कुछ नहीं बोले; लेकिन शाम को जब सब लोग अग्निकुंड के सम्मुख एकत्रित हुए तो उन्होंने ओजस्वी भाषा में कहा कि यह बाह्य पूजा अद्वैत साधना के विरूद्व है। तुम्हें यह नहीं देखना कि गुरूदेव के कान कैसे और आंख कैसी थी। तुम्हें उनके आदर्श को समझना और उसे ही प्रचारित-प्रसारित करना है !
रामकृष्ण परमहंस की मूर्ति दूसरे दिन वहां से उठ गई।
मायावती आश्रम में स्वास्थ्य खराब होते हुए भी विवेकानन्द बड़े व्यस्त रहते
होता है। उस समय तो वे कुछ नहीं बोले; लेकिन शाम को जब सब लोग अग्निकुंड के सम्मुख एकत्रित हुए तो उन्होंने ओजस्वी भाषा में कहा कि यह बाह्य पूजा अद्वैत साधना के विरूद्व है। तुम्हें यह नहीं देखना कि गुरूदेव के कान कैसे और आंख कैसी थी। तुम्हें उनके आदर्श को समझना और उसे ही प्रचारित-प्रसारित करना है !
रामकृष्ण परमहंस की मूर्ति दूसरे दिन वहां से उठ गई।
मायावती आश्रम में स्वास्थ्य खराब होते हुए भी विवेकानन्द बड़े व्यस्त रहते