न तुम्हारे पश्चात्य गुरू ही-उन्हें हल करना तो दूर की बात हैं। (नवम खंड, पृष्ठ 292)
जब मिशनरियों का सांस्कृतिक आक्रमण विफल हुआ और ईसाई धर्म की समृद्वि का जादू नहीं चल पाया, तब थियोसोफिस्ट सोसाइटी की रचना हुई। इस ‘ट्राजन हार्स’ का काम भीतर घुसकर पाखंड फेलाना और उभरती हुई राष्ट्रीय चेतना
203 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
को नष्ट करना था। लेख यों शुरू होता है:
‘थियोसाफिस्टों का दावा है कि उन्हें इस विश्व का आदिम दिव्य ज्ञान प्राप्त है। हमें यह जानकर प्रसन्नता हुई,
न तुम्हारे पश्चात्य गुरू ही-उन्हें हल करना तो दूर की बात हैं। (नवम खंड, पृष्ठ 292)
जब मिशनरियों का सांस्कृतिक आक्रमण विफल हुआ और ईसाई धर्म की समृद्वि का जादू नहीं चल पाया, तब थियोसोफिस्ट सोसाइटी की रचना हुई। इस ‘ट्राजन हार्स’ का काम भीतर घुसकर पाखंड फेलाना और उभरती हुई राष्ट्रीय चेतना
203 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
को नष्ट करना था। लेख यों शुरू होता है:
‘थियोसाफिस्टों का दावा है कि उन्हें इस विश्व का आदिम दिव्य ज्ञान प्राप्त है। हमें यह जानकर प्रसन्नता हुई,