में प्रकाशित लेखों के लेखक में इस बसके ज्ञान का आरोप हम नहीं कर सकते, पर लेखक महोदय को अपने थियोसोफिस्ट भाइयों और स्वयं अपने को हिन्दू जाति के साथ एक समझने की भूल नहीं करनी चाहिए, अधिकांश हिन्दू जाति ने प्रारम्भ ही से थियोसोफी के घटनास्थल को अ च्छी तरह समझ लिया था और वह महान स्वामी दयानन्द सरस्वती के नेतृत्व में, जिन्होंने ब्लैवेटस्कीवाद की वास्तविकता पहचान कर ही उसके ऊपर से अपनी छत्र-छाया हटा ली थी, थियोसाफी से दूर ही रही।’’
में प्रकाशित लेखों के लेखक में इस बसके ज्ञान का आरोप हम नहीं कर सकते, पर लेखक महोदय को अपने थियोसोफिस्ट भाइयों और स्वयं अपने को हिन्दू जाति के साथ एक समझने की भूल नहीं करनी चाहिए, अधिकांश हिन्दू जाति ने प्रारम्भ ही से थियोसोफी के घटनास्थल को अ च्छी तरह समझ लिया था और वह महान स्वामी दयानन्द सरस्वती के नेतृत्व में, जिन्होंने ब्लैवेटस्कीवाद की वास्तविकता पहचान कर ही उसके ऊपर से अपनी छत्र-छाया हटा ली थी, थियोसाफी से दूर ही रही।’’