मैडम ब्लैवेटस्की और श्रह आल्काट थियोसाफी के अग्रणी नेता थे। प्रारम्भ में इन लोंगों ने स्वामी दयानन्द को अपना नेता बनाया और उनकी आड़ में अपना कार्य शुरू किया, पर स्वामी दयानन्द पुररूत्थावादी होते हुए भी देशभक्त थे। उन्होंने शीघ्र ही थियोसाफिस्टों की नियत को समझ लिया और उनसे अलग हो गए। विवेकानन्द आगे लिखते हैं:
‘‘पश्चिम के थियोसाफिस्टों द्वारा हिन्दुओं के धर्म को जो एकमात्र सहायता प्राप्त हुई है, वह तैयार खेत मिल जाने जैसी सहायता नहीं है,
मैडम ब्लैवेटस्की और श्रह आल्काट थियोसाफी के अग्रणी नेता थे। प्रारम्भ में इन लोंगों ने स्वामी दयानन्द को अपना नेता बनाया और उनकी आड़ में अपना कार्य शुरू किया, पर स्वामी दयानन्द पुररूत्थावादी होते हुए भी देशभक्त थे। उन्होंने शीघ्र ही थियोसाफिस्टों की नियत को समझ लिया और उनसे अलग हो गए। विवेकानन्द आगे लिखते हैं:
‘‘पश्चिम के थियोसाफिस्टों द्वारा हिन्दुओं के धर्म को जो एकमात्र सहायता प्राप्त हुई है, वह तैयार खेत मिल जाने जैसी सहायता नहीं है,