मायावी पाखंड और हाथ पर आम उगानेवाली फकीरी विद्या-यह सब पश्चिम के शिक्षित लोगों के दिमाग में एक ही बन गए थे। थियोसाफिस्टों द्वारा हिन्दू धर्म की सहायता बस केवल इतनी ही है।’’
और फिर अन्तिम पैरे की सूक्ष्मता पर विचार कीजिए और व्यंग्य का मज़ा लीजिए:
204 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
‘‘थियोसाफी द्वारा हर देश में जो तात्कालिक महान कल्याण हमारी दृष्टि से हुआ, वह यक्ष्मा के रोगी के फेफड़ों में दिए जाने वाले प्रोफेसर कोच के इंजेक्शनों की भांति,
मायावी पाखंड और हाथ पर आम उगानेवाली फकीरी विद्या-यह सब पश्चिम के शिक्षित लोगों के दिमाग में एक ही बन गए थे। थियोसाफिस्टों द्वारा हिन्दू धर्म की सहायता बस केवल इतनी ही है।’’
और फिर अन्तिम पैरे की सूक्ष्मता पर विचार कीजिए और व्यंग्य का मज़ा लीजिए:
204 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
‘‘थियोसाफी द्वारा हर देश में जो तात्कालिक महान कल्याण हमारी दृष्टि से हुआ, वह यक्ष्मा के रोगी के फेफड़ों में दिए जाने वाले प्रोफेसर कोच के इंजेक्शनों की भांति,