योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

पर वे अपने हास्य तथा बातचीत द्वारा सदा उन्हें प्रसन्न रखने की चेष्टा करते थे। आने वालों से वार्तालाप उन्होंने कभी बंद नहीं किया। विश्वविद्यालय के छात्रों तथा युवकों को देखकर वे विशेष रूप से प्रसन्न होते थे और उनके साथ देश की दुर्दशा तथा उसके प्रतिकार के उपाय के संबंध में घंटों चर्चा करते थे। स्वामी जी बड़े आनन्द से ओजपूर्ण भाषा में उन्हें सबल तथा शक्तिशाली समझकर अगर स्वामी जी से उन्हें बन्द करने की प्रार्थना की जाती थी जो वे बहुता उत्तर देते थे,


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पर वे अपने हास्य तथा बातचीत द्वारा सदा उन्हें प्रसन्न रखने की चेष्टा करते थे। आने वालों से वार्तालाप उन्होंने कभी बंद नहीं किया। विश्वविद्यालय के छात्रों तथा युवकों को देखकर वे विशेष रूप से प्रसन्न होते थे और उनके साथ देश की दुर्दशा तथा उसके प्रतिकार के उपाय के संबंध में घंटों चर्चा करते थे। स्वामी जी बड़े आनन्द से ओजपूर्ण भाषा में उन्हें सबल तथा शक्तिशाली समझकर अगर स्वामी जी से उन्हें बन्द करने की प्रार्थना की जाती थी जो वे बहुता उत्तर देते थे,


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