बयान की है। 1901 में कलकत्ता के देशभक्तों ने ‘शिवाजी उत्सव’ मनाने की व्यवस्था कि ताकि प्रत्येक प्रान्त के देशभक्त नायकों से परिचय प्राप्त किया जाए। पर कोई भी व्यक्ति सरकार के डर से उसकी अध्यक्षता करने को तैयार नहीं था। आखिर वे बेलूर मठ पहुंचे और स्वामी जी से उत्सव की अध्यक्षता के लिए प्रार्थना की। उनकी सारी बात सुनकर स्वामी जी की आंखों में आंसु उमड़ आए, ‘कहा, ‘‘मां, बलि चाहती है। ‘इंडियन मिरर’ के सम्पादक नरेन्द्रनाथ सेन
बयान की है। 1901 में कलकत्ता के देशभक्तों ने ‘शिवाजी उत्सव’ मनाने की व्यवस्था कि ताकि प्रत्येक प्रान्त के देशभक्त नायकों से परिचय प्राप्त किया जाए। पर कोई भी व्यक्ति सरकार के डर से उसकी अध्यक्षता करने को तैयार नहीं था। आखिर वे बेलूर मठ पहुंचे और स्वामी जी से उत्सव की अध्यक्षता के लिए प्रार्थना की। उनकी सारी बात सुनकर स्वामी जी की आंखों में आंसु उमड़ आए, ‘कहा, ‘‘मां, बलि चाहती है। ‘इंडियन मिरर’ के सम्पादक नरेन्द्रनाथ सेन