योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

परन्तु इस अनाहार तथा अन्रिदा में भी स्वामी जी को विश्राम नहीं था। कुछ दिनों में मठ में नवीन विश्वकोश ‘ब्रिटेनिका’ खरीदा गया है। नई चमकाने वाली पुस्तकों को देख शिष्य स्वामी जी से बोले, ‘इतनी पुस्तकें एक जीवन में पढ़ना कठिन है।’’ शिष्य उस समय तक नहीं जानते थे कि स्वामी जी ने पुस्तकों में से इसी बीच में दस खंडों का अध्ययन समाप्त कर ग्यारहवें खंड को पढ़ना आरम्भ किया है।

‘‘स्वामी जी बोले-‘क्या कहता है। इन इस पुस्तकों में से


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परन्तु इस अनाहार तथा अन्रिदा में भी स्वामी जी को विश्राम नहीं था। कुछ दिनों में मठ में नवीन विश्वकोश ‘ब्रिटेनिका’ खरीदा गया है। नई चमकाने वाली पुस्तकों को देख शिष्य स्वामी जी से बोले, ‘इतनी पुस्तकें एक जीवन में पढ़ना कठिन है।’’ शिष्य उस समय तक नहीं जानते थे कि स्वामी जी ने पुस्तकों में से इसी बीच में दस खंडों का अध्ययन समाप्त कर ग्यारहवें खंड को पढ़ना आरम्भ किया है।

‘‘स्वामी जी बोले-‘क्या कहता है। इन इस पुस्तकों में से


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