योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

तेरी जो इच्छा हो मुझसे पूछ ले-सब कह दूंगा।’ शिष्य ने विस्मित होकर पूछा-‘क्या आपने इन पुस्तकों को पढ़ लिया है?’ स्वामी जी बोले-‘क्या बिना पढ़े ही कह रहा हूं ‘इसके बाद स्वामी जी ने उन विषयों का पुस्तक में लिखित मर्म तो बताया ही-उस पर स्थान-स्थान में उस पुस्तक की भाषा तक ज्यांे बोलने लगे। शिष्य ने उन बड़े-बड़े दस खंडों में प्रत्येक ही में ऐसे एक दो विषयों पर प्रश्न किया और स्वामी जी की असाधारण बुद्वि तथा स्मरणशक्ति को देख विस्मित होकर पुस्तकों को उठाकर रखते हुए कहा,


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तेरी जो इच्छा हो मुझसे पूछ ले-सब कह दूंगा।’ शिष्य ने विस्मित होकर पूछा-‘क्या आपने इन पुस्तकों को पढ़ लिया है?’ स्वामी जी बोले-‘क्या बिना पढ़े ही कह रहा हूं ‘इसके बाद स्वामी जी ने उन विषयों का पुस्तक में लिखित मर्म तो बताया ही-उस पर स्थान-स्थान में उस पुस्तक की भाषा तक ज्यांे बोलने लगे। शिष्य ने उन बड़े-बड़े दस खंडों में प्रत्येक ही में ऐसे एक दो विषयों पर प्रश्न किया और स्वामी जी की असाधारण बुद्वि तथा स्मरणशक्ति को देख विस्मित होकर पुस्तकों को उठाकर रखते हुए कहा,


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