योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand



206 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

किया। स्वामी जी के निर्देश से मठ में उनके लिए पूरी, तरकारी, मिठाई, दही आदि का प्रबन्ध किया गया और वे स्वयं उन्हें खिलाने लगे। केष्टा नाम के एक संथाल से स्वामी जी की विशेष घनिष्ठता थी, वह खाते-खाते बोला, ‘‘अरे स्वामी बाप, तुम्हें ऐसी चीजे़ कहां से मिली-हमने तो कभी ऐसा नहीं खाया।’’ उन्हें खूब छकाकर स्वामी जी ने कहा, ‘‘तुम लोग तो नारायण हो-आज मेरे नारायण का भोग हुआ।’’

जब वे खाकर चले गए तो स्वामी जी ने शिष्यों से कहा,


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206 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

किया। स्वामी जी के निर्देश से मठ में उनके लिए पूरी, तरकारी, मिठाई, दही आदि का प्रबन्ध किया गया और वे स्वयं उन्हें खिलाने लगे। केष्टा नाम के एक संथाल से स्वामी जी की विशेष घनिष्ठता थी, वह खाते-खाते बोला, ‘‘अरे स्वामी बाप, तुम्हें ऐसी चीजे़ कहां से मिली-हमने तो कभी ऐसा नहीं खाया।’’ उन्हें खूब छकाकर स्वामी जी ने कहा, ‘‘तुम लोग तो नारायण हो-आज मेरे नारायण का भोग हुआ।’’

जब वे खाकर चले गए तो स्वामी जी ने शिष्यों से कहा,


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